Happy birthday champawat 🎂24 साल का युवा हुआ चम्पावत जिला,आज के ही दिन 1997 में हुई थी स्थापना

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चम्पावत- देवभूमि उत्तराखंड के चम्पावत जिले की स्थापना को आज 24 वर्ष पूर्ण हो चुके है।वर्ष 1997 को तत्कालीन यूपी की मुख्यमंत्री मायावती ने चम्पावत जिले की सौगात चम्पावत वासियों को दी थी। चम्पावत जिला उत्तराखंड में स्थित एक प्रसिद्ध एवम् लोकप्रिय पर्यटन स्थल है।चम्पावत जिला अपने प्राकृतिक सौंदर्य व ऐतिहासिक मंदिर स्थल के रूप में अपनी अलग पहचान रखता है। चम्पावत जहां 1613 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है वही इसकी सीमाएं नेपाल,उधमसिंह नगर जिला , नैनीताल जिला और अल्मोड़ा जिले के साथ मिलती है। टनकपुर से 75 किमी की दूर राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे उत्तराखण्ड राज्य के चम्पावत नगर में इस जिले का प्रशासनिक मुख्यालय है। पौराणिक इतिहास के अनुसार चम्पावत जिले को चंद वंश की राजधानी माना जाता है।चंपावत जिला अपने प्राकृतिक सौंदर्य के साथ इस जिले में स्थित ऎतिहसिक धार्मिक स्थलों के लिए भी प्रसिद्ध है।

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कुमाऊं के इतिहास में चम्पावत का विशिष्ट स्थान रहा है। गुरुपादुका नामक ग्रन्थ के अनुसार नागों की बहन चम्पावती ने चम्पावत के बालेश्वर मन्दिर के पास तपस्या की थी। उसकी स्मृति में चम्पावती का मन्दिर आज भी बालेश्वर मन्दिर समूह के अंदर स्थित है। वायु पुराण के अनुसार चम्पावती पुरी नागवंशीय नौ राजाओं की राजधानी थी। 700 ई॰ में बद्रीनाथ की यात्रा पर आये झूसी के चन्द्रवंशी राजपूत सोमचन्द ने स्थानीय राजा ब्रह्मदेव की एकमात्र कन्या ‘चम्पा’ से विवाह कर इस स्थान को दहेज में प्राप्त किया। अपना राज्य स्थापित कर उन्होंने अपनी रानी के नाम पर ही चम्पावती नदी के तट पर चम्पावत नगर की स्थापना की, और उसके मध्य में ‘राजबुंगा’ नामक किला बनवाया।

राजा सोमचन्द के बाद उनके पुत्र आत्मचन्द, चन्द वंश के उत्तराधिकारी बने। पश्चात क्रमशः संसार चन्द, हमीर चन्द, वीणा चन्द आदि ने चम्पावत की राजगद्दी संभाली। सोलहवीं शताब्दी आते आते राजा भीष्म चन्द ने राजधानी राज्य के मध्य किसी केन्द्रीय स्थान पर ले जाने का निर्णय किया। भीष्म चन्द के बाद उनके पुत्र बालो कल्याण चन्द ने अपने पिता की इच्छानुसार सन् १५६३ में अपने राज्य का विस्तार करते हुये राजधानी अल्मोड़ा में स्थानान्तरित कर दी। चम्पावत में चन्द राजाओं का राज्यकाल ८६९ वर्षों तक रहा। चन्द काल के समय चम्पावत और कूर्मांचल (काली कुमाऊं) में लगभग दो-तीन सौ घर थे।

ब्रिटिश शासन काल में १८७२ में पौड़ी के साथ-साथ चम्पावत को तहसील का दर्जा दिया गया। तहसील बनने के बाद अंग्रेज अधिकारियों केे इस क्षेत्र में आशियाने बनने लगे। अल्मोड़ा जनपद की इस सीमान्त तहसील को १९७२ में पिथौरागढ़ जनपद में शामिल कर दिया गया। छोटी प्रशासनिक इकाइयों को विकास में सहायक मानने, तथा दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए उत्तर प्रदेश की तत्कालीन मुख्यमंत्री, मायावती ने 15 सितम्बर 1997 को चम्पावत को जनपद का दर्जा दे दिया।

आइए आपको चम्पावत जिले के प्रमुख मंदिरों व धार्मिक पर्यटन स्थलों से रूबरू करवाते है।

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मां पूर्णागिरी धाम

चंपावत जिले टनकपुर तहसील क्षेत्र में मां पूर्णागिरि का प्रसिद्ध मन्दिर स्थित है।जो कि लाखो लोगो की आस्था का केंद्र है। पूर्णागिरी मन्दिर उत्तराखण्ड के टनकपुर में अन्नपूर्णा शिखर पर 5500 फुट की ऊँचाई पर स्थित है। यह 108 सिद्ध पीठों में से एक है।जिसे नाभि स्थल के रूप में पूजा जाता है। यह स्थान मां महाकाली की पीठ माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार दक्ष प्रजापति की कन्या और शिव की अर्धांगिनी सती की नाभि का भाग यहाँ पर विष्णु चक्र से कट कर गिरा था। प्रतिवर्ष इस शक्ति पीठ की यात्रा पर देश भर से श्रद्धालु कष्ट सहकर भी यहाँ आते हैं।

बालेश्वर मंदिर चम्पावत

बालेश्वर मंदिर चम्पावत जिले के प्रमुख धर्मस्थलों में से एक है।भगवान शिव के धर्म स्थल के रूप में इस प्राचीन मंदिर पर स्थानीय लोगो की अपार आस्था है। बालेश्वर मंदिर चम्पावत जिला मुख्यालय के चंपावत शहर में स्थित है। बालेश्वर मंदिर पत्थर की नक्काशी का एक अद्भुत प्रतीक है। भगवान शिव को बालेश्वर नाम से यहां पर पूजा जाता था। बालेश्वर के परिसर में दो अन्य मंदिर भी उपस्थित हैं जिसमे एक “रत्नेश्वर” को समर्पित है और दूसरा मंदिर “चम्पावती दुर्गा” को समर्पित है | बालेश्वर मंदिर अपनी खूबसूरती के साथ अलग पहचान बनाए हुए हैं और मंदिर कि खूबसूरती लोगों को अपनी ओर खींचती है और सोचने को मजबूर कर देती है | बालेश्वर मंदिर में महाशिवरात्रि के दिन एक भव्य मेले का आयोजन किया जाता है जिसमें भक्तो का सैलाब उमडा होता है।

रीठा साहिब गुरुद्वारा

चम्पावत जिले में सिख धर्म का प्रमुख धर्म स्थल रीठा साहिब गुरुद्वारा भी मौजूद है।जिसे मीठा रीठा साहिब भी कहा जाता है , उत्तराखण्ड के चंपवात जिले में ड्युरी नामक एक छोटे गांव में स्थित है। इसे गुरुद्वारे को सिखों द्वारा अत्यधिक पवित्र माना जाता है और यह पवित्र स्थान चम्पावत से लगभग 72 कि.मी. की दुरी पर स्थित है। इस गुरुद्वारा का निर्माण 1960 में गुरु साहिबान ने करवाया था और यह ड्युरी गांव के निकट स्थित लोदिया और रतिया नदी के संगम पर स्थित है। इस स्थान के बारे में यह कहा जाता है कि गुरु नानक जी ने इस जगह का दौरा किया था और ऐसी मान्यता है कि गुरू नानक जी गोरखपंथी जोगी से धार्मिक और अध्यात्मिक चर्चा के लिए यहां आए थे। यह जगह एक खास तरह के मीठे रीठा फल पेड़ों के लिए भी प्रसिद्ध है।गुरुनानक जी ने भूख लगने पर इस कड़वे रीठे जे फल को अपनी यात्रा के दौरान अपने शिष्य मरदाना को दिया था।तभी से इस पेड़ के रीठा मीठे हो गए।कालांतर में इस स्थान पर रीठा साहिब गुरुद्वारे का निर्माण हुआ।जो कि सिख धर्म के साथ अन्य धर्म के लोगो के भी धार्मिक आस्था का केंद्र है।

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पंचेश्वर महादेव मंदिर

चम्पावत जिले के लोहाघाट से लगभग 38 कि.मी. की दूरी पर काली एवं सरयू नदी के संगम पंचेश्वर महादेव का मंदिर स्थापित है। पंचेश्वर महादेव मंदिर भगवान शिव का एक पवित्र मंदिर है।इस मंदिर को स्थानीय लोगों द्वारा चुमू (ईष्ट देवता) के नाम से भी जाना जाता है। स्थानीय लोग चैमु की जाट की पूजा करते हैं । मंदिर में भक्त ज्यादातर चैत्र महीने में नवरात्रि के दौरान आते हैं और इस स्थल पर मकर संक्रान्ति के अवसर पर विशाल मेले का आयोजन भी किया जाता है। पंचेश्वर मंदिर सुंदर जंगल के बीचो बीच नेपाल सीमा क्षेत्र में जंगलों , धाराओं और उच्च फूलों से प्राकृतिक फूलों से घिरा हुआ है। पंचेश्वर महादेव मंदिर के बारे में स्थानीय लोगों का विश्वास है कि भगवान शिव ने पास के गांवों के पशुओं की रक्षा की है।इसलिए इस मंदिर पर जिले के लोगो की अपार आस्था है।

एक हथिया नौला

चंपावत जिला मुख्यालय से 5 किमी दूर स्थित एक हथिया नौला एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है। पत्थर को तराश कर बनाया गया एक हथिया नौले की कलाकृति पौराणिक कथा के कारण भी प्रसिद्ध है। ऐसी मान्यता है कि इस पूरी आकृति को एक हाथ वाले शिल्पकार ने एक रात में तराश कर बनाया था। यह पत्थर पर किया जाने वाला एक शानदार कार्य है जो कि यह चंद राजवंश के युग के दौरान बनाया गया था। लोक मान्यता है कि चंद राजा का राज महल व कुमांऊ की स्थापत्य कला के लिए प्रसिद्ध बालेश्वर मंदिर का निर्माण करने वाले मिस्त्री जगन्नाथ का एक हाथ चंद शासकों ने कटवा दिया था ताकि बालेश्वर मंदिर जैसा निर्माण दोबारा न हो सके | एक हथिया का नौला वर्तमान समय में भी स्थापत्य कला प्रेमियों के लिये आकर्षण का केन्द्र है।

हिंगला देवी मंदिर

हिंगला देवी मंदिर देवभूमि उत्तराखंड के चम्पावत जिले के दक्षिण में पहाड़ो की चोटी पर घने बांज के जंगलो के बीच में स्थित एक प्रसिद्ध मंदिर है। यह देवी पीठ इस क्षेत्र के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक है इस मंदिर में देवी हिंगला को “माँ भवानी” के रूप में पूजा जाता है। हिंगलादेवी मंदिर की प्राकर्तिक छटा अत्यधिक अनमोल है और इस पवित्र स्थल से पुरे चम्पावत शहर के दर्शन किये जा सकते है | हिंगलादेवी का मंदिर करीब डेढ़ दशक पहले तक एक छोटे से स्थान पर था और उस स्थान पर एक कुटिया भी बनी थी।हिंगला सिद्धि को प्रदायक देवी के रूप में भी माना जाता हैं। लोगों का विश्वास है कि मां की शरण में आने से उनकी कल्याणप्रद मनोकामनाएं अवश्य पूरी होती हैं और भक्तो की मन चाही इच्छा पूर्ण होती हैं।

ऐतिहासिक वाणासुर का किला

वाणासुर का किला चम्पावत जिले का एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है ।यह क़िला लोहाघाट से लगभग 7 किलोमीटर की दूरी पर ‘कर्णरायत’ नामक स्थान के पास स्थित है । कर्णरायत से बाणासुर किले तक लगभग 1.5 किलोमीटर की दूरी पैदल तय करने के बाद पहुंचा जा सकता है। यह किला समुद्र तल से 1859 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी स्थान पर भगवान श्रीकृष्ण के द्वारा बाणासुर का वध किया गया था क्योंकि बाणासुर ने श्रीकृष्ण के पौत्र का अपहरण कर लिया था। पहाड़ी शैली में निर्मित इस किले में पत्थरों का उपयोग किया गया है और इसकी बनावट प्राकृतिक मीनार की भांति है।

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मायावती आश्रम

चम्पावत जिले में स्थित मायावती आश्रम उत्तराखंड के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में से एक है। मायावती आश्रम चम्पावत शहर से 22 कि.मी. की दुरी पर स्थित है। समुद्र तल से 1940 मीटर की ऊंचाई पर बना यह आश्रम हर साल भारी संख्या में भारतीय और विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करता है। इस आश्रम को “अद्वैत आश्रम” के नाम से भी जाना जाता है | अद्वैत आश्रम रामकृष्ण मठ की एक शाखा है जो कि भारत के उत्तराखण्ड राज्य के चम्पावत जिले में मायावती नामक स्थान पर स्थित है। इस आश्रम में एक छोटा सा संग्रहालय और एक पुस्तकालय भी है। यहां का मौसम ज्यादातर ठंडा रहता है ।बंगाली समाज के लोग कलकत्ता आदि स्थानों से हर वर्ष बहुतायत रूप में इस स्थान पर पहुँचते है।

एबट माउंट

उत्तराखंड के चंपावत जिले में यह प्रसिद्ध पर्यटन स्थल लोहाघाट से लगभग 8 किमी और चम्पावत जिले में काली नदी सीमा के पास कुमाऊं पहाड़ियों के पूर्वी हिस्से में स्थित है।लोहाघाट समुद्र तल से 7000 फीट ऊपर की ऊंचाई पर स्थित है।माउंट एबट की स्थापना 20 वीं शताब्दी में जॉन हेरोल्ड एबॉट नामक एक अंग्रेजी व्यवसायी ने की थी। इसे जॉन हेरॉल्ड एबॉट द्वारा स्थापित किया गया इसीलिए इसका नाम “माउंट एबट” रखा गया यह स्थान ब्रिटिश राज में अंग्रेजो के शासन काल में बसाया गया था। यह स्थान कुमाऊ हिमालय की गोद में बसा हुआ है जहाँ से हिमालय का नज़ारा देखते ही बनता है। माउंट एबट दुनिया भर में अपनी ख़ूबसूरती के लिए प्रसिद्ध है।

श्यामलाताल झील

श्यामलाताल झील टनकपुर से चम्पावत की ओर लगभग 22 कि.मी. दूरी पर स्थित एक पर्यटन स्थल है। श्यामलाल एक प्राकृतिक झील है जो कि खटीमा शहर से 30 किमी दूर स्थित एक सुंदर गांव में स्थित हैश्यामलाताल कुमाऊं क्षेत्र में सबसे रमणीय और आकर्षक झीलों में से एक है।यह जगह सभी आध्यात्मिक साधकों और प्रकृति प्रेमियों के लिए एक शानदार स्थान है।यह खूबसूरत झील लगभग 1.5 वर्ग किलोमीटर फैली है।इस स्थान पर स्वामी विवेकानन्द जी की ध्यान स्थली के रूप में वर्तमान समय में एक आश्रम स्थापित है। यह क्षेत्र विवेकानंद आश्रम के लिए सबसे प्रसिद्ध और लोकप्रिय है।इस स्थान पर आश्रम की स्थापना 1913 में स्वामी विवेकानंद के द्वारा की गयी थी।

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2 Comments

  1. बहुत ही सुन्दर चंपावत जिले का दर्शन आपकी न्यूज़ के माध्यम से हुआ।धन्यवाद दीपक फुलेरा

  2. बहुत ही सुन्दर।अतुलनीय

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