लोहाघाट: जंगली जानवरों को जंगल में ही प्राकृतिक रूप से रोकने के लिए केविके ने शुरू की नई पहल

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केंद्र की उद्यान वैज्ञानिक के प्रयास रंग लाए तो जंगली जानवरों से परेशान किसानों को मिलेगी राहत।

लोहाघाट(चंपावत)- कृषि विज्ञान केंद्र की उद्यान वैज्ञानिक डॉ रजनी पंन्त के प्रयास फलीभूत हो गए तो किसानों को जंगली जानवरों से राहत मिलने लगेगी। डॉ पंत द्वारा जंगल में फल पौध तैयार करने के लिए “बीज बम” तैयार किया जा रहे हैं जिसमें आधी मिट्टी व उतना ही सुखा गोबर मिलकर उसे इस प्रकार तैयार किया जा रहा है कि उसे गोले के बीच में आडू, खुमानी, अन्य फलों व सब्जियों के बीच डालकर उन्हें गोल आकृति देकर धुप में सुखाया जा रहा है। इस बीज बम यानी गोले को सूखाने के बाद उन्हें किसानों को दिया जाएगा। जहां वे अपने पास के जंगल में जमीन को थोड़ा खोदकर कर उसमें बीज बम डाल देंगे जो थोड़ी सी वर्षा होने पर अंकुरित होने लगेंगे। बाद में यही बीज बम फलदर वृक्ष की शक्ल ले लेगे।

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डॉ पंत के अनुसार उनके द्वारा जंगलों में जंगली मेहल के पौधों में फलदार मेहलो की कलम यानी ग्राफ्टिंग कर इस तकनीक से भी जंगलों में फलदार पेड़ तैयार करने की योजना बनाई है। जिसके तहत जंगल के समीप रहने वाले गांव के युवक एवं युवतियों को बकायदा प्रशिक्षण दिया जाएगा जिससे वह अपने स्तर से ग्राफ्टिंग कर सके।

डीएफओ आरसी काण्डपाल ने उद्यान वैज्ञानिक की पहल का स्वागत करते हुए कहा कि विभाग के पास ऐसे तमाम कर्मचारी उपलब्ध है जिन्हें उक्त वैज्ञानिक से प्रशिक्षण दिलाया जाएगा। जिससे वह जंगलों में मेहल के पौधों में ग्राफ्टिंग कर सकें। विभाग के पास सभी उपकरण उपलब्ध हैं। वन विभाग बीज बम को जंगलों में लगाने के कार्य में भी पूरा सहयोग करेगा। उन्होंने बताया कि उद्यान वैज्ञानिक से संवाद स्थापित कर ऐसे प्रयासों पर भी चर्चा की जाएगी की कैसे किसानों को जंगली जानवरों से राहत दी जा सके।

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Deepak Fulera

देवभूमि उत्तराखण्ड में आप विगत 18 वर्षों से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं। आप अपनी पत्रकारिता में बेबाकी के लिए जाने जाते हैं। सोशल प्लेटफॉर्म में जनमुद्दों पर बेबाक टिपण्णी व सक्रीयता आपकी पहचान है। मिशन पत्रकारिता आपका सर्वदा उद्देश्य रहा है।

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