
प्रतिवर्ष दो माह के लिए जन्मभूमि की माटी का तिलक लगाने आते रहे हैं राज भट्ट
लोहाघाट(उत्तराखंड)- पहाड़ों की शान्त वादियों से अपना पुश्तैनी नाता तोड़कर पूर्वजों की विरासत को वीरान करते आ रहे लोगों के लिए इंग्लैंड की प्रमुख ईलारा कंपनी के मालिक (सीईओ) राज भट्ट आईना दिखा रहे हैं। तमाम संघर्षों को पार करते हुए सात समुद्र पार जाकर अपनी क्षमता और प्रतिभा से ऊंचे मुकाम में पहुंचे राज भट्ट ऐसे व्यक्ति हैं जो भावात्मक रूप से देवभूमि के सामाजिक, सांस्कृतिक, आध्यात्मिक, धार्मिक, शैक्षिक आदि जीवन के अनेक पहलुओं से जुड़े हुए हैं। प्रतिवर्ष यह अपने व्यस्त जीवन से समय निकालकर दो माह के लिए देवभूमि आते हैं।
राज भट्ट द्वारा सैकड़ो विद्यालयों को गोद लिया हुआ है तथा कई मूकबधिर, दिव्यांग, विद्यालयों का संचालन कर समाज के बेहद कमजोर वर्ग के लोगों को सक्षम बनाने में भी लगे हुए हैं। उनके द्वारा कई धर्मशालाओं, गौ सेवा केंद्र को भी सहायता दी जा रही है।राज भट्ट प्रतिवर्ष करोड़ों रुपए यहां के सामाजिक उत्थान में खर्च कर रहे हैं।
मूल रूप से चंपावत जिले के पाटी ब्लाक अंतर्गत सिरमोली गांव के डॉ एलडी भट्ट एवं श्रीमती हीरा भट्ट के बेटे राज भट्ट प्रत्येक वर्ष अपनी जन्म भूमि की माटी का तिलक लगाने गांव आते हैं। उनकी रुचि शुरू से ही गहत की दाल, पहाड़ी चावल का भात, भट्ट की चुणकानी, लाल चावल की खीर,भांग की चटनी, मंडुवे बाजरे व मक्का की रोटी, गडेरी की सब्जी आदि पहाड़ी उत्पाद रहे हैं। राज भट्ट का कहना है कि यहां के मोटे अनाजों में प्रकृति ने भर पूर पौष्टिकता भरी हुई है। पहाड़ों में प्रतिभाओं की कमी नहीं है वह उनके लिए आगे बढ़ाने की अवसर देते आ रहे हैं। पहाड़ों से पलायन कर रहे लोगों से राज भट्ट का कहना है कि इतनी सुंदर आबोहवा एवं साफ सुथरा वातावरण में रहने का अवसर तो भाग्यवानों को ही मिलता है। अब पहाड़ों में जीवन की जटिलताएं कम होने से यहां से पलायन कर चुके लोग पुनः अपने पूर्वजों की विरासत से जुड़ने का मूड बनाते जा रहे हैं।
पहाड़ों में युवाओं में बढ़ती नशे की लत से चिंतित राज भट्ट ने चंपावत में नशा मुक्ति केंद्र की स्थापना कर युवाओं को नशे से दूर कर उत्तराखंड को नशा मुक्त करने का बीड़ा भी उठाया है। विगत 11 नवंबर को स्वदेश आए राज भट्ट देवभूमि के विभिन्न अंचलों में भ्रमण कर अपने द्वारा चलाए जा रहे सेवा प्रकल्पों की समीक्षा कर रहे हैं। उनके साथ प्रमुख उद्यमी नरेंद्र लडवाल भी चल रहे हैं।





